छु ……………. ना है आसमान (गीत) – राकेश कुमार

छू………….ना  है आसमान

RakeshG.Kumar@lntpower.com

सुन हवा फीते बाँध ले या अपनी आँधियों को थाम ले, सांस हमने भी भर ली है  जिद उड़ने की पकड़ ली है !

सुन सूरज आँख मिला या कर दे धूप रिहा, राख हमने भी मल ली है जिद जलने की पकड़ ली है !

काफी नहीं उजाला हमें और धूप चाहिये

हर रंग को मिला के एक नया रूप चाहिए।

जंग लगी बेड़ियों को औकात दिखानी है

बंदिशों की स्याही खुद ही मिटानी है।

अलख जगा के

शंख  बजा के,

हाथों को पंख बना के

छू………….ना  है आसमान

सुन  हवा फीते बाँध ले, या अपनी आँधियों को थाम ले, सांस हमने भी भर ली है  जिद उड़ने की पकड़ ली है !

सुन सूरज आँख मिला, या कर दे धूप रिहा, राख हमने भी मल ली है जिद जलने की पकड़ ली है!

हर मुश्किल से यारी की है, लड़ने की तैयारी की है।

जन्म, ज़िस्म की ना परवाह करके, जीने की तैयारी की है।

अब हर प्रहार लपट सुनामी

मस्त कलंदर मस्त जवानी

हुड़दंग मचा के

शंख बजा के

हाथों को पंख बना के

छू………….ना  है आसमान

सुन  हवा फीते बाँध ले, या अपनी आँधियों को थाम ले, सांस हमने भी भर ली है  जिद उड़ने की पकड़ ली है !

सुन सूरज आँख मिला, या कर दे धूप रिहा, राख हमने भी मल ली है जिद जलने की पकड़ ली है!

  • राकेश कुमार
  • rakeshg.kumar@lntpower.com
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