चिड़िया कैसे बाज़ हुई – प्रशांत टंडन

टकराया फिर दिल से दिल , दिल की ना आवाज़ हुई |
कल तक जो इक चिड़िया थी , आज वो कैसे बाज़ हुई ||१||

ये कैसी है दास्ताँ , मशहूर हुई फिर राज़ हुई |
हम तो कल-कल कहते थे, आज मगर ये आज हुई ||२||

तनहाई की पीर ख़ामोशी, कैसे कब ये साज़ हुई |
आंसू के गिरने की रिमजिम , रिमजिम सी आवाज़ हुई ||३||

मुझसे मिलकर बिछड़ गए वो, किस्मत यूँ नाराज़ हुई |
उनकी याद में हमने जाना , उनकी उम्रदराज़ हुई ||४||

उनके पहलु में जब सर था, हुई फ़कीरी ताज़ हुई |
पायल के जब घुंघरू बोले, रुनझुन सी आवाज़ हुई ||५||

पंख लगे जब सपनों को, तबीयत किसकी नासाज़ हुई |
पंख लगा कर मैंने जाना, चिड़िया कैसे बाज़ हुई || इति ||

प्रशांत टंडन

Prashanttandon789@gmail.com

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