खामोश सा हो गया (कविता) – जुनेजा शशिकांत

खामोश सा हो गया जब रक्त अपना बह गया
शब्द भी खामोश थे, दिल क्या जाने कह गया.

खामोश सा हो गया, जब रक्त अपना बह गया

शब्द भी तो मात दे गए , अकस्मात दे गए.
आंसू भी खुश्क हो गए, नयन  जबाब दे गए.
तिरंगे से वो लिपट गए, दिल रोता रह गया.

खामोश सा हो गया, जब रक्त अपना बह गया.

गम से छलनी है हुआ, पर गर्व है गुमान है.
तुम हो अगर तो हम हैं, तुमसे हमारा मान है.
शान हो तुम हमारी, तिरंगा हमारा कह गया.

खामोश सा हो गया, जब रक्त अपना बह गया

कतरा कतरा कह गया, कहानी उस जवान की.
चिंता नहीं थी जिसको, पीछे नन्ही सी जान की.
आओ हम दुलार दें, यह फ़र्ज़ अपना कह गया.

खामोश सा रह गया, जब रक्त अपना बह गया.

इज़हार ना कर पाए हम, दिल तड़प के रह गया.
बह गया लहू बहुत, ना जाने क्या क्या कह गया.
रख लेना तुम हिसाब मेरे, रक्त का जो बह गया.

खामोश सा हो गया, जब रक्त अपना बह गया.
शब्द भी खामोश थे, दिल क्या जाने कह गया.

खामोश सा हो गया……

Lyrics by
Juneja SHASHI KANT J Sk

junejashashi@gmail.com

junejashashikant

 

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