क्या मैं तुम्हे याद आ रहा हूँ? – Prakash H. Patil

तुमसे दूर-

एक अंजान शहर जा रहा हूँ…

मैं तो तुम्हे याद कर रहा हूँ-

क्या मैं तुम्हे याद आ रहा हूँ?

 

यहाँ भी कुछ दोस्त मिले-

न जाने क्यूं मैं उन्हें भा रहा हूँ…

मैं तो तुम्हे याद कर रहा हूँ,

क्या मैं तुम्हे याद आ रहा हूँ?

 

वक्त गुजारने याद में तुम्हारी

गीत वही पुराना गुनगुना रहा हूँ…

मैं तो तुम्हे याद कर रहा हूँ,

क्या मैं तुम्हे याद आ रहा हूँ?

 

तुम्हारे हाथ की खुशबु यहाँ कैसी

जो खाना मिले मैं यहाँ खा रहा हूँ…

मैं तो तुम्हे याद कर रहा हूँ,

क्या मैं तुम्हे याद आ रहा हूँ?

 

करवटे बदलते सोनेकी कोशिश में हूँ,

पर सो नहीं पा रहा हूँ…

मैं तो तुम्हे याद कर रहा हूँ,

क्या मैं तुम्हे याद आ रहा हूँ?

 

प्रकाश पाटील , वसई ९८९०५६०९९९

acres111@gmail.com

 

This entry was posted in Members Contributions, Members' Creations. Bookmark the permalink.