कुछ उम्र कट गयी यहाँ, कुछ और अभी बाकि है (गीत) – Stanish John Gill

कुछ उम्र कट गयी यहाँ, कुछ और अभी बाकि है.

चलता रहे जामे दौर युही, इतनी गुजारिश साकी है.

 

एक मैं रहु एक तू रहे, और बस यह मैख़ाना रहे

छलकाए रख तू युही जाम, खाली ना यह पैमाना रहे.

इस बेइलाज़ मर्ज़ को ज़रूरत बस इस दवा की है.

कुछ उम्र कट गयी यहाँ, कुछ और अभी बाकि है.

 

आई बहार और चल भी दी, हम देख़ते ही रह गए.

कलियाँ खिली मुर्ज़ा गयी , फ़क्त वीराने ही रह गए.

बेजान हम  चमन में  हो गए , यह हाल उनकी अदा की है.

कुछ उम्र कट गयी यहाँ, कुछ और अभी बाकि है.

 

परवाना समज़ के वह हमे , कुछ इस तरह जला गए.

अपने मजे के वास्ते , हमे ख़ाक में मिला गये.

कितनो को है मिटा दिया , यह बात उस शमा की है.

कुछ उम्र कट गयी यहाँ, कुछ और अभी बाकि है.

 

अपने तो वोह ना बन सके , जीते थे जिनके वास्ते.

गुमराह हो गए है हम , दिखते नहीं अब रास्ते.

सब चाहते अब मिट गई , एक चाह बस कज़ा की है.

कुछ उम्र कट गयी यहाँ, कुछ और अभी बाकि है.

 

 

Written by,

Stanish John Gill.

9987413282.

writer.stanish@gmail.com

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