किलकारियाँ (कविता) – अमित कुमार तिवारी

कविता :   किलकारियां
कवि : अमित कुमार तिवारी

वह घुटनों के बल मेरा फिसलना
बात बात में शरारत करना
कभी तुम्हारे पैरों के सहारे
पांवों पर खडे होने की कोशिश करना
कहीं भी गिरूं तो मां मां पुकारना मेरा
तुम्हारा वह रसोई से आना
मुझे चुप कराने के लिये
ध्यान कहीं और बंटाना
कभी दिन में आसमान में
उगते सूरज को दिखाना
जब लौटूं स्कूल से तो
आते ही मां क्या बना है
कह कह के मेरा दोहराना दुलराना
तुम्हारा मेरा मनपसंद पकवान लेके आना
आज अवाक स्तब्ध हूं थोड़ा निशब्द हूं
सूना सूना हुआ मेरा जहां
अभिव्यक्ति नहीं कर सकती ज़बान
तुम चाहे जहाँ भी हो मेरी मां
दिल की धड़कने देती हैं किलकारियां
सर पे हाथ फिराती हो आज भी
हमारी हौसला अफज़ाई करती मां ।।

AMIT KUMAR TIWARI

amitaapkamitra@gmail.com

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