कहानी की ख़ोज में – धवल चोखाडिया

एक लेखक अपने आस-पास के हालात को, अपनी और दुसरो की जिंदगी को एक अलग नज़रिए से देखता है | अच्छा और बुर जो भी हो रहा हो उसे देखे, देखे और सोचे | कहीं ना कहीं आपको एक अच्छी कहानी मिल जायेगी | आपकी नज़रो के सामने ऐसी हज़ारो कहानिया है, बस उस हज़ारो कहानियो में से उस एक कहानी की खोज करनी है जीसको आप पूर्ण रूप से न्याय दे सके | जैसे कोई साधु इश्वर की ख़ोज में तपस्या करता है बस वैसे ही लेखक को भी कहानी की खोज करने के लिए तपस्या करनी पड़ती है | राइटर्स डायजेस्ट की वेबसाईट पे एक बहुत अच्छी लाइन पढ़ी थी, उसका हिंदी रूपांतरण कुछ इस तरह है, “आप को लिखने के लिए कोई जोर जबरदस्ती नहीं कर रहा है”, बात बिलकुल सच है | हर लेखक को अपने आप से ये सवाल ज़रूर पूछना चाहिए की, “वो क्यूँ लिखना चाहता है? और क्या लिखना चाहता है?” इस दो सवाल के आपको कई सारे जवाब मिल जायेंगे | एक लेखक बहुत संघर्ष से गुज़रता है और कई कठिनाइयों का सामना करने के बाद एक लेखक, लेखक बन पाता है | संघर्ष ख़त्म हो जाने का मतलब ये नहीं की अब आप एरकंडीशन रूम में बैठकर लिख रहे हो | कई बार एक अच्छा आइडिया ईरानी काफे में बैठकर भी आ सकता है |

फिल्मो से हमारा लगाव क्यूँ है? हमने ऐसी बहुत फिल्मे देखि होंगी जिनसे हम प्रभावित हुए है | कई फिल्मे हमने एक से ज्यादा बार देखी होंगी और हर बार वो फिल्म नई लगती है | कहानी एक जादू की तरह है | वो जादू जो दिलों-दिमाग पर हावी रहता है और हम उस लेखक की राइटिंग और थोट प्रोसेस (thought process) समजने की कोशिष करते है | कहानी का नशा कभी नहीं उतरता इसी लिए लेखक दिमागी तौर पर कभी फ्री नहीं होता | किसी फिल्म की कहानी हो या अपनी खुद की कहानी हो, हम अपने लेखक दोस्तों के साथ कई घंटो तक विचार विमर्श करते है, बातचीत के दौरान क्रियेटिव मतभेद भी सामने आते है और यही तो राइटिंग प्रोसेस की खूबी है | एक ही विचार को आप अलग अलग तरीकों से कह सकते हो | एक कहानी को तैयार करने में कई महीने बीत जाते है, कभी कभी तो कई साल भी गुज़र जाते है | हम एक कहानी को शिल्पकार की तरह मुकम्मल आकार देने की कोशिष करते है | एक लेखक होना यानी अपने आप से बहुत उम्मीदें रखना | अच्छा लिखने की ज़िद हर लेखक में होनी चाहिए | लोग लेखक को उसकी कहानी से जानते है |

एक लेखक थोडा बगावती तो होता है | बाहर से ज्यादा ये बगावत भीतर की होती है | “कड़वाहट” शब्द पूरी तरह नकारात्मक (Negative) नहीं है | एक लेखक की जिंदगी में ऐसे कई मुकाम आते है जब अपनी जिंदगी से उसे कई बार कड़वाहट मिलती है | इसी कड़वाहट को दूर करने के लिए हम कहानी लिखते है | अनकहे जज्बातों को कहने के लिए हम कहानी लिखते है | जिंदगी की ख़ूबसूरती, विडम्बना और रिश्तों की पेचीदगी को दिखाने के लिए हम कहानी लिखते है | इस दुनिया के कडवे सच दिखाने के लिए हम कहानी लिखते है | सिर्फ पैसे ही कमाने होते तो इस दुनिया में राइटिंग के अलावा और भी बहुत व्यवसाय है | हम इसी लिए लिखते है क्यूंकि उस कहानी को हम जी सके और महसूस कर सके | अपने किरदारों को अपने तजुर्बो के मुताबिक ढाल सके | गुस्सा, प्यार और नफरत जैसे जज्बातों को संवाद का रूप दे सके और ये कहानी हम ऑडियंस के सामने रख सके | अगर कहानी कामियाब होती है तो तुम सीधे ऑडियंस से कनेक्ट हुए हो और अगर कहानी कामियाब नहीं होती तो उसकी वजह ढूंढने की कोशिष करना पर लिखना मत छोड़ना | क्यूंकि, एक लेखक कभी हारता नहीं | फिर से कोई कहानी की खोज में निकल पड़ना | जीतनी गहरी ख़ोज होगी उतनी ही शानदार कहानी होगी !!!

Contribution from: Dhaval Chokhadia
Email: dhaval.chokhadia@gmail.com
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