ऐ दिल है मुश्किल (समीक्षा) – पंकज सुबीर

ऐ दिल है मुश्किल (फर्स्ट डे फर्स्ट शो)

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क्यों बनाई जाती हैं आख़िर इस प्रकार की फिल्में ? करण जौहर ने किसी शो में कहा था कि उन्होंने लंदन में करीब एक पखवाड़े रहकर इस फिल्म की कहानी लिखी थी। हैरत की बात यह है कि इस फिल्म में से वही ग़ायब है, कहानी। कई सारे जुमले याद आ रहे हैं- चूँ-चूँ का मुरब्बा, बेसिरपैर, भानमती का कुनबा, आदि आदि आदि। इंटरवल के पहले जो कुछ चल रहा होता है उसे आपको केवल झेलना है, उसमें कोई कहानी जैसा कुछ है ही नहीं, बस चल रहा है सो चल रहा है। कहीं कोई कहानी लाइन नहीं है। कुछ तो भी हो रहा है बस। उस पर हद यह कि इंटरवल के पहले तक फिल्म में केवल दो ही पात्र हैं। कहीं कोई तीसरा नहीं है। केवल रणवीर और अनुष्का को देखते रहो। इंटरवल के बाद भी केवल दो पात्र और बढ़ते हैं फवाद और एश्वर्या राय। और हाँ इंटरवल के बाद ऐसा लगता है कि कहानी जैसा कुछ आया है, आभासी रूप में। लेकिन यह ग़लतफहमी भी कुछ ही देर बाद मिट जाती है। एश्वर्या राय सुंदर दिखी हैं, लेकिन एक बात समझ में नहीं आई कि वह इस ‌फिल्‍म में क्यों हैं। क्यों है का मतलब यह कि वह जो रोल है वह क्यों है ? यूँ ही आईं और यूँ ही निकल लीं। लेकिन एश्वर्या का आना परदे को ज़रा अतिरिक्त सुंदरता से भर देता है। जब भी फिल्मों का इतिहास लिखा जाएगा तो इस बात की ज़रूर पड़ताल की जाएगी की एश्वर्या का पात्र इस फिल्म में क्यों आता है। नहीं आता तो भी क्या हो जाता। बीच में शाहरुख और आलिया भी आए हैं मगर केवल एक ही सीन में। पूरी फिल्म में आपको केवल रणीवर और अनुष्का को ही देखना है। रणवीर का पात्र कुछ अजीब सा है, बिल्कुल अस्थिर सा। कभी कुछ, कभी कुछ। वैसा ही कुछ अनुष्का का भी पात्र है। कहानी का अंत किसी अंग्रेज़ी कहानी की याद दिलाता है। अरे हाँ एक बात तो कहना भूल ही गया, फिल्म के वे सारे गाने जो रिलीज़ के पहले ही पापुलर हो गए थे, वे सब फिल्म में वेस्ट किए गए हैं। मुझे लगता है कि करण के लिए सबसे अच्छा यही था कि वे पाँच करोड़ नहीं देते और फिल्म को रिलीज़ ही नहीं होने देते। वे भी बच जाते और दर्शक तो बचते ही बचते। फिल्म का नाम करण ने यह क्यों रखा, उसका भी कारण है, असल में बिना किसी कहानी के, केवल दो पात्रों के साथ फिल्म बनाना इतना मुश्किल है कि करण को कहना ही पड़ा ऐ दिल है मुश्किल…….

Contribution from: Pankaj Kumar Purohit (Pankaj Subeer)
Email: subeerin@gmail.com
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