उपन्यासकार-कथाकार संजीव

हिंदी साहित्य के प्रमुख हस्ताक्षर उपन्यासकार-कथाकार संजीव पिछले सप्ताह मुंबई प्रवास पर थे। फिल्म रायटर्स एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी कमलेश पांडे जी के आग्रह पर संजीव जी एसोसिएशन के कार्यालय भी पधारे। जहाँ भिखारी ठाकुर और महेन्दर मिसिर को लेकर देर तक चर्चा चली।

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संजीव जी ने भिखारी ठाकुर के बहाने “सूत्रधार” नाम से कालजयी उपन्यास लिखा है। सूत्रधार न सिर्फ भिखारी ठाकुर के व्यक्तित्व और कृतित्व को रेखांकित करता है, बल्कि उस समाज के चेहरे और चरित्र को भी उजागर करता है।
कमलेश पांडे सूत्रधार में एक अच्छी फिल्म की संभावना देखते हैं। इसलिए उन्होंने संजीव जी को उसकी प्रासंगिकता को लेकर छेड़ा। संजीव जी ने समाज के लोगों के पलायन को दो स्तरों पर देखने की जरूरत बताई, एक अंत: प्रवास और दूसरा बाह्य प्रवास। यानी कोलकाता से लेकर मॉरिशस, सूरीनाम आदि देशों में गए प्रवासियों की मजबूरियों, समस्याओं और विसंगतियों की विवेचना करनी होगी।
महेन्दर मिसिर को लेकर भी काफी बातें हुई। संजीव जी ने उनपर भी उपन्यास लिखना चाहा था, मगर शोध के उपरांत लिखने का मन छोड़ दिया। उनसे जुड़े कई प्रसंगों को उन्होंने बस मिथ बताया।

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संजीव इस बात से बेहद खुश हुए कि फिल्म रायटर्स एसोसिएशन मुंबई में भिखारी ठाकुर और महेन्दर मिसिर को याद कर रहा है और संजो कर रखना चाहता है। कमलेश जी ने संजीव जी को एसोसिएशन का पूरा कार्यालय दिखलाया। संजीव जी को अच्छा लगा। सुखद यह रहा कि पूरे समय मैं भी उनके साथ रहा।

 

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