आपके आने से (कविता) – ओंकार सिंह ‘विवेक’

मुक्तक (1)
आपके आने से हर मंज़र सुहाना हो गया ,
हर किसी के दिल में ख़ुशियों का ठिकाना हो गया .
आपकी आमद के कारण ही हमारी बज़्म में ,
जो न आते थे कभी उनका भी आना हो गया .
मुक्तक (2)
किसी के पास खाने को हमेशा तर निवाले हैं ,
किसी को पेट भरने के लिए रोटी के लाले हैं .
मिटेंगी ही नहीं तब तक विषमता की ये खाईँयां ,
सियासतदान  जब तक स्वार्थी और मन के काले हैं .
मुक्तक (3)
हर क़दम हौसले की बात करना ,
बढ़ के विपदा से दो दो हाथ करना .
जिस से माँ बाप के ऊँचे रहे सर ,
आप वो काम ही दिन रात करना .
मुक्तक  (4)
रख आँधियों के सामने दीपक को बाल कर ,
कहने लगें सब वाह  कुछ ऐसा कमाल कर  .
लेते हैं जग में लोग तो औरों से प्रेरणा ,
कायम मगर तू आप ही अपनी मिसाल कर .
                                                         —- ओंकार सिंह विवेक
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