अपेक्षा और उपेक्षा (कविता) – अमित कुमार तिवारी

अपेक्षा और उपेक्षा में
एक बारीक फर्क है
एक देती दर्द है
दूसरी सुखद क्षण है
यदि तुम करते हो
खुद से यह दोनों
दूजें समझे तुमको बौना
कर्म करो सही दिशा में
दशायें तो क्षणभंगुर हैं
बदलते मौसम का ज्वर हैं
जिसके फेर में जीते दुर्बल हैं
जो है ही नहीं सांसों में
उस सन्निपात का नाम
कायरों ने रखा डर है
इसे मार भगाओ मन से
भीतर घात से बाहर आओ
पर कुतरे आसमानों ने
शुरूआतें ऐसे ही होती यारों ।।

कविताकार – अमित कुमार तिवारी ( आपका अमित)
E MAIL – amitapkamitra@gmail.com

 

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